Chapter 14: बरखा और मेघा

अध्याय परिचय

“बरखा और मेघा” एक रोचक कहानी है जिसमें दो सहेलियों—एक मुर्गी (मेघा) और एक बत्तख (बरखा)—की समझदारी और सहयोग को दिखाया गया है। यह कहानी बच्चों को साहस, बुद्धिमानी और एक-दूसरे की मदद करने की सीख देती है।

विस्तृत नोट्स (सरल भाषा में)

एक बार की बात है, दो सहेलियाँ थीं—मेघा (मुर्गी) और बरखा (बत्तख)। दोनों के तीन-तीन बच्चे थे और वे सभी मेला देखने दूसरे गाँव जा रहे थे।

रास्ते में एक नदी आ गई। मेघा डर गई और बोली कि हम नदी कैसे पार करेंगे, हम तो डूब जाएँगे।

तब बरखा ने कहा कि हम सब तैरकर नदी पार कर लेंगे। उसने सभी को अपने पास बुलाया और उन्हें तरीका बताया।

बरखा की समझदारी से सभी खुश हो गए और “हुर्रे!” कहकर खुशी मनाई। फिर वे सब मिलकर नदी पार कर गए।

इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि मुश्किल समय में घबराना नहीं चाहिए, बल्कि समझदारी और साहस से काम लेना चाहिए।

शब्दार्थ (महत्वपूर्ण व कठिन शब्द)

शब्दअर्थ
सहेलीदोस्त
नदीबहता हुआ पानी
पार करनाएक ओर से दूसरी ओर जाना
डूबनापानी में नीचे जाना
तैरनापानी में चलना
तरीकाउपाय
समझदारीबुद्धिमानी
साहसहिम्मत

प्रश्न-उत्तर

Q1: मेघा और बरखा कौन थीं?
Ans: वे दो सहेलियाँ थीं—एक मुर्गी और एक बत्तख।

Q2: मेघा और बरखा के कितने बच्चे थे?
Ans: दोनों के तीन-तीन बच्चे थे।

Q3: वे कहाँ जा रही थीं?
Ans: वे मेला देखने दूसरे गाँव जा रही थीं।

Q4: रास्ते में क्या आया?
Ans: रास्ते में नदी आई।

Q5: मेघा क्यों डर गई?
Ans: क्योंकि उसे लगा कि वे डूब जाएँगे।

Q6: बरखा ने क्या कहा?
Ans: उसने कहा कि हम तैरकर नदी पार कर लेंगे।

Q7: बरखा ने क्या किया?
Ans: उसने सभी को बुलाकर तरीका बताया।

Q8: बच्चे कैसे खुश हुए?
Ans: बच्चे “हुर्रे!” कहकर खुश हुए।

Q9: उन्होंने नदी कैसे पार की?
Ans: उन्होंने तैरकर नदी पार की।

Q10: इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?
Ans: हमें मुश्किल समय में समझदारी और साहस से काम लेना चाहिए।

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