Chapter 8: खतरे में साँप

अध्याय परिचय

“खतरे में साँप” एक रोचक कहानी है जिसमें जंगल के जानवरों की बैठक और उनके विचारों को दिखाया गया है। यह कहानी हमें सिखाती है कि संकट के समय सही निर्णय लेना बहुत जरूरी होता है।

विस्तृत नोट्स (सरल भाषा में)

इस कहानी में सभी जंगल के जानवर एक जगह इकट्ठे होते हैं। वे इस बात पर चर्चा करते हैं कि खतरे के समय अपनी जान कैसे बचाई जाए।

सभी जानवर बहुत देर तक इस विषय पर बहस करते हैं। अंत में बंदर की सलाह सबको अच्छी लगती है। बंदर कहता है कि खतरे के समय “सिर पर पैर रखकर भागना” सबसे अच्छा उपाय है।

बातचीत समाप्त होने के बाद सभी जानवर अपने-अपने घर चले जाते हैं। लेकिन साँप वहीं बैठे रहते हैं और एक-दूसरे का मुँह देखते रहते हैं।

इससे पता चलता है कि साँप बंदर की सलाह को ठीक से समझ नहीं पाए।

यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें बात को सही तरीके से समझना चाहिए और समय पर सही निर्णय लेना चाहिए।

शब्दार्थ (महत्वपूर्ण व कठिन शब्द)

शब्दअर्थ
खतरासंकट, डर की स्थिति
इकट्ठेएक जगह जमा होना
बहसविचार-विमर्श
सलाहसुझाव
उपायसमस्या का हल
मुँह ताकनाएक-दूसरे को देखते रहना
ठिकानारहने की जगह
समझनाबात को जानना

प्रश्न-उत्तर

Q1: सभी जानवर कहाँ इकट्ठे हुए थे?
Ans: सभी जानवर जंगल में इकट्ठे हुए थे।

Q2: जानवर किस विषय पर चर्चा कर रहे थे?
Ans: वे खतरे के समय अपनी जान बचाने के बारे में चर्चा कर रहे थे।

Q3: किसकी सलाह सबको अच्छी लगी?
Ans: बंदर की सलाह सबको अच्छी लगी।

Q4: बंदर ने क्या सलाह दी?
Ans: बंदर ने कहा कि खतरे के समय “सिर पर पैर रखकर भागना” चाहिए।

Q5: बातचीत के बाद जानवर क्या करते हैं?
Ans: सभी जानवर अपने-अपने ठिकाने चले जाते हैं।

Q6: कौन वहीं बैठे रह गए?
Ans: साँप वहीं बैठे रह गए।

Q7: साँप क्या करते रहे?
Ans: वे एक-दूसरे का मुँह देखते रहे।

Q8: साँप क्यों नहीं भागे?
Ans: क्योंकि वे सलाह को ठीक से समझ नहीं पाए।

Q9: “सिर पर पैर रखकर भागना” का क्या अर्थ है?
Ans: इसका अर्थ है बहुत तेज़ी से भाग जाना।

Q10: इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?
Ans: हमें बात को सही तरह समझना चाहिए और समय पर सही निर्णय लेना चाहिए।

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