📕 Class 4 • Hindi
Chapter

शतरंज में मात

नोट्स, शब्दार्थ, प्रश्न-उत्तर और क्विज़ — इस अध्याय की पूरी सामग्री एक ही जगह।

अध्याय परिचय

“शतरंज में मात” एक रोचक नाटक है जिसमें तेनालीरामन की बुद्धिमानी और चतुराई को दिखाया गया है। इस कहानी में दरबारियों की ईर्ष्या, राजा का क्रोध और तेनाली की सूझ-बूझ के माध्यम से यह बताया गया है कि कठिन परिस्थिति में भी समझदारी से काम लेने पर समस्या का समाधान किया जा सकता है। यह नाटक बच्चों को चतुराई, धैर्य और बुद्धिमत्ता का महत्व सिखाता है।

विस्तृत नोट्स (सरल भाषा में)

इस नाटक की शुरुआत राजा के दरबार से होती है, जहाँ कुछ दरबारी तेनालीरामन से ईर्ष्या करते हैं। वे सोचते हैं कि राजा हमेशा तेनाली की ही प्रशंसा करते हैं, इसलिए वे उन्हें नीचा दिखाने की योजना बनाते हैं।

दरबारी राजा को बताते हैं कि तेनालीरामन शतरंज के बहुत बड़े खिलाड़ी हैं। राजा यह सुनकर उत्साहित हो जाते हैं और तेनाली को शतरंज खेलने के लिए बुलाते हैं।

जब तेनाली दरबार में आते हैं, तो वे साफ-साफ कहते हैं कि उन्हें शतरंज खेलना नहीं आता, लेकिन राजा उनकी बात नहीं मानते। दरबारियों के बहकावे में आकर राजा उनसे खेल खेलने को कहते हैं।

खेल शुरू होता है और तेनाली जानबूझकर गलत चालें चलते हैं। राजा को लगता है कि तेनाली उनका अपमान कर रहे हैं, इसलिए वे क्रोधित हो जाते हैं। अंत में राजा गुस्से में आकर तेनाली को दंड देते हैं कि उनका सिर मुँडवा दिया जाएगा।

अगले दिन जब नाई तेनाली का सिर मुँडने आता है, तब तेनाली अपनी चतुराई दिखाते हैं। वे कहते हैं कि उनके बालों पर पाँच हजार अशर्फियाँ उधार हैं, इसलिए बिना ऋण चुकाए वे बाल नहीं कटवा सकते। राजा तुरंत पैसे दिलवा देते हैं।

इसके बाद भी तेनाली एक और चाल चलते हैं। वे कहते हैं कि उनके लिए राजा माता-पिता के समान हैं और माता-पिता के सामने मुँडन करना अशुभ होता है। यह सुनकर राजा डर जाते हैं और तुरंत दंड वापस ले लेते हैं।

अंत में तेनाली अपनी बुद्धिमानी से न केवल दंड से बच जाते हैं, बल्कि पाँच हजार अशर्फियाँ भी प्राप्त कर लेते हैं। दरबारी उनकी चतुराई देखकर हैरान रह जाते हैं और हार मान लेते हैं।

इस प्रकार यह नाटक हमें सिखाता है कि बुद्धि और समझदारी से बड़ी से बड़ी समस्या को भी आसानी से हल किया जा सकता है।

शब्दार्थ (महत्वपूर्ण व कठिन शब्द)

शब्दसरल अर्थ
दरबारराजा की सभा
दरबारीराजा के साथ रहने वाले लोग
ईर्ष्याजलन
योजनासोच-समझकर बनाया गया उपाय
चतुराईसमझदारी
अनाड़ीजिसे काम ठीक से न आता हो
दंडसजा
मुँडनसिर के बाल काटना
अशर्फियाँसोने के सिक्के
ऋणउधार
सूझ-बूझसमझदारी से सोचने की शक्ति
क्रोधितगुस्से में
उपायहल
घाघबहुत चालाक
प्रशंसातारीफ

प्रश्न-उत्तर

Q1. “शतरंज में मात” नाटक के मुख्य पात्र कौन-कौन हैं?

उत्तर: इस नाटक के मुख्य पात्र राजा, तेनालीरामन और दरबारी हैं।

Q2. दरबारी तेनालीरामन से क्यों जलते थे?

उत्तर: दरबारी तेनालीरामन से इसलिए जलते थे क्योंकि राजा उनकी बहुत प्रशंसा करते थे।

Q3. दरबारियों ने राजा से क्या कहा?

उत्तर: दरबारियों ने राजा से कहा कि तेनालीरामन बहुत अच्छे शतरंज खिलाड़ी हैं।

Q4. राजा ने तेनाली को क्या करने के लिए कहा?

उत्तर: राजा ने तेनाली को शतरंज खेलने के लिए कहा।

Q5. तेनाली ने शतरंज के बारे में क्या कहा?

उत्तर: तेनाली ने कहा कि उन्हें शतरंज खेलना नहीं आता।

Q6. खेल के दौरान तेनाली कैसी चालें चलते हैं?

उत्तर: खेल के दौरान तेनाली जानबूझकर गलत और अनाड़ी चालें चलते हैं।

Q7. राजा को क्रोध क्यों आया?

उत्तर: राजा को इसलिए क्रोध आया क्योंकि तेनाली गलत चालें चल रहे थे और खेल खराब कर रहे थे।

Q8. राजा ने तेनाली को क्या दंड दिया?

उत्तर: राजा ने तेनाली का सिर मुँडवाने का दंड दिया।

Q9. तेनाली ने मुँडन से बचने के लिए क्या कहा?

उत्तर: तेनाली ने कहा कि उनके बालों पर पाँच हजार अशर्फियाँ उधार हैं।

Q10. राजा ने तेनाली की बात सुनकर क्या किया?

उत्तर: राजा ने तुरंत पाँच हजार अशर्फियाँ दिलवा दीं।

Q11. तेनाली ने दूसरी चाल क्या चली?

उत्तर: तेनाली ने कहा कि राजा उनके माता-पिता के समान हैं।

Q12. यह सुनकर राजा ने क्या किया?

उत्तर: यह सुनकर राजा डर गए और दंड वापस ले लिया।

Q13. तेनाली को इस घटना से क्या लाभ हुआ?

उत्तर: तेनाली दंड से बच गए और उन्हें पाँच हजार अशर्फियाँ भी मिल गईं।

Q14. दरबारियों की योजना का क्या परिणाम हुआ?

उत्तर: दरबारियों की योजना असफल हो गई और वे हार गए।

Q15. तेनालीरामन का स्वभाव कैसा था?

उत्तर: तेनालीरामन बहुत बुद्धिमान और चतुर थे।

Q16. इस नाटक से हमें क्या सीख मिलती है?

उत्तर: इस नाटक से हमें समझदारी और धैर्य से काम लेने की सीख मिलती है।

Q17. राजा का स्वभाव कैसा दिखाया गया है?

उत्तर: राजा का स्वभाव जल्दी क्रोधित होने वाला दिखाया गया है।

Q18. दरबारियों का व्यवहार कैसा था?

उत्तर: दरबारियों का व्यवहार ईर्ष्यालु और चालाक था।

Q19. तेनाली ने कठिन परिस्थिति को कैसे संभाला?

उत्तर: तेनाली ने अपनी चतुराई और बुद्धिमानी से परिस्थिति को संभाला।

Q20. इस नाटक का मुख्य संदेश क्या है?

उत्तर: इस नाटक का मुख्य संदेश यह है कि बुद्धि और चतुराई से हर समस्या का समाधान किया जा सकता है।

क्या आप क्विज़ के लिए तैयार हैं?

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