📕 Class 5 • Hindi
Chapter 9

न्याय

नोट्स, शब्दार्थ, प्रश्न-उत्तर और क्विज़ — इस अध्याय की पूरी सामग्री एक ही जगह।

अध्याय परिचय

यह पाठ एक नाटक के रूप में लिखा गया है जिसमें न्याय, दया और करुणा का महत्व बताया गया है। कहानी में कपिलवस्तु के राजकुमार सिद्धार्थ और उनके चचेरे भाई देवदत्त के बीच एक घायल पक्षी को लेकर विवाद होता है। इस विवाद को सुलझाने के लिए वे महाराज के दरबार में जाते हैं, जहाँ बुद्धिमानी से न्याय किया जाता है। यह पाठ हमें सिखाता है कि सच्चा न्याय वही है जिसमें करुणा और सही सोच हो।

विस्तृत नोट्स (सरल भाषा में)

यह कहानी राजकुमार सिद्धार्थ और उनके मित्र से शुरू होती है, जो राज-उद्यान में बैठकर प्रकृति की सुंदरता का आनंद ले रहे होते हैं। वे प्रकृति के नियमों पर चर्चा करते हैं कि कैसे हर चीज अपने समय पर होती है—जैसे सूरज का निकलना और पक्षियों का लौटना।

इसी दौरान एक हंस को तीर लग जाता है और वह घायल होकर नीचे गिर पड़ता है। सिद्धार्थ तुरंत उस हंस को उठाकर उसकी देखभाल करते हैं और उसके शरीर से तीर निकाल देते हैं। वे उस पक्षी के प्रति बहुत दया और करुणा दिखाते हैं।

कुछ ही समय बाद देवदत्त वहाँ आता है और कहता है कि यह हंस उसका है, क्योंकि उसने उसे तीर मारकर गिराया है। लेकिन सिद्धार्थ कहते हैं कि उन्होंने उस हंस को बचाया है, इसलिए वह उनका है। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हो जाता है।

अंत में वे महाराज के पास न्याय के लिए जाते हैं। वहाँ मंत्री एक बुद्धिमान उपाय सुझाते हैं। वह हंस को बीच में रखकर दोनों को उसे बुलाने के लिए कहते हैं। जब देवदत्त हंस को बुलाता है तो हंस डर जाता है और उसके पास नहीं जाता। लेकिन जब सिद्धार्थ प्यार से बुलाते हैं तो हंस तुरंत उनकी गोद में आ जाता है।

इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि हंस किसके साथ सुरक्षित और खुश है। मंत्री और महाराज निर्णय देते हैं कि हंस सिद्धार्थ का है, क्योंकि उन्होंने उसकी रक्षा की है।

यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा न्याय वही है जिसमें दया, प्रेम और करुणा हो। किसी को नुकसान पहुँचाने से बेहतर है उसकी रक्षा करना।

शब्दार्थ (महत्वपूर्ण व कठिन शब्द)

शब्दअर्थ (सरल हिंदी में)
न्यायसही फैसला करना
उद्यानबगीचा
सखामित्र
व्याकुलबेचैन होना
स्वभावकिसी चीज़ की प्राकृतिक आदत
अचरजआश्चर्य
निर्दयीजिसमें दया न हो
करुणादया, दूसरों पर दया करना
घायलचोट लगना
प्रमाणसबूत
विवादझगड़ा या मतभेद
आखेटशिकार करना
शरणसहारा लेना
निर्णयअंतिम फैसला
मंत्रीसलाह देने वाला अधिकारी
स्नेहप्यार
तिलमिलानागुस्सा होना
निर्दोषजिसने कोई गलती न की हो
सहलानाप्यार से हाथ फेरना

प्रश्न-उत्तर

Q1. सिद्धार्थ और उनके सखा क्या कर रहे थे?

उत्तर: सिद्धार्थ और उनके सखा राज-उद्यान में बैठे हुए प्रकृति की सुंदरता का आनंद ले रहे थे और आपस में बातें कर रहे थे।

Q2. उस समय का वातावरण कैसा था?

उत्तर: उस समय का वातावरण बहुत शांत और सुहावना था, पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौट रहे थे और गायें अपने बछड़ों के पास जा रही थीं।

Q3. सिद्धार्थ और सखा किस बात पर चर्चा कर रहे थे?

उत्तर: सिद्धार्थ और सखा इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि प्रकृति में हर कार्य अपने निश्चित समय पर होता है, जैसे सूरज का निकलना और मौसम का बदलना।

Q4. अचानक क्या घटना घटी?

उत्तर: अचानक एक पक्षी को तीर लग गया और वह घायल होकर नीचे गिर पड़ा, जिससे दोनों चौंक गए।

Q5. घायल पक्षी को देखकर सिद्धार्थ ने क्या किया?

उत्तर: घायल पक्षी को देखकर सिद्धार्थ ने उसे तुरंत उठाया, उसके शरीर से तीर निकाला और उसे प्यार से संभालने लगे।

Q6. सिद्धार्थ ने पक्षी के बारे में क्या भावना व्यक्त की?

उत्तर: सिद्धार्थ ने पक्षी को निर्दोष और भोला बताते हुए कहा कि इसने किसी का क्या बिगाड़ा है जो इसे घायल किया गया।

Q7. देवदत्त कौन था और उसने क्या किया था?

उत्तर: देवदत्त सिद्धार्थ का चचेरा भाई था और उसने ही उस पक्षी पर तीर चलाकर उसे घायल किया था।

Q8. देवदत्त पक्षी को अपना क्यों बता रहा था?

उत्तर: देवदत्त पक्षी को अपना इसलिए बता रहा था क्योंकि उसने उसे तीर मारकर गिराया था और वह उसे अपना शिकार मान रहा था।

Q9. सिद्धार्थ पक्षी को अपना क्यों मान रहे थे?

उत्तर: सिद्धार्थ पक्षी को अपना इसलिए मान रहे थे क्योंकि उन्होंने उसे बचाया था और उसकी रक्षा की थी।

Q10. सिद्धार्थ और देवदत्त के बीच विवाद क्यों हुआ?

उत्तर: दोनों के बीच विवाद इसलिए हुआ क्योंकि देवदत्त पक्षी को अपना मान रहा था जबकि सिद्धार्थ उसे लौटाने से मना कर रहे थे।

Q11. विवाद को सुलझाने के लिए क्या निर्णय लिया गया?

उत्तर: विवाद को सुलझाने के लिए यह निर्णय लिया गया कि दोनों महाराज के पास जाकर न्याय प्राप्त करेंगे।

Q12. महाराज ने देवदत्त से क्या पूछा?

उत्तर: महाराज ने देवदत्त से पूछा कि वह इस समय क्यों आया है और उसने अपनी शिकायत बताई कि सिद्धार्थ उसका पक्षी नहीं दे रहे हैं।

Q13. महाराज ने सिद्धार्थ से क्या पूछा?

उत्तर: महाराज ने सिद्धार्थ से पूछा कि क्या वह पक्षी वास्तव में देवदत्त का है और वह उसे क्यों नहीं लौटा रहे हैं।

Q14. सिद्धार्थ ने अपना पक्ष कैसे रखा?

उत्तर: सिद्धार्थ ने कहा कि देवदत्त ने पक्षी को घायल किया है, परंतु उन्होंने उसे बचाया है और बचाने वाला मारने वाले से बड़ा होता है।

Q15. मंत्री ने समस्या का समाधान कैसे किया?

उत्तर: मंत्री ने पक्षी को बीच में रखकर दोनों से उसे बुलाने को कहा ताकि देखा जा सके कि पक्षी किसके पास जाना चाहता है।

Q16. देवदत्त ने पक्षी को बुलाने पर क्या हुआ?

उत्तर: देवदत्त के बुलाने पर पक्षी डर गया और उसके पास जाने की बजाय फड़फड़ाने लगा।

Q17. सिद्धार्थ ने पक्षी को बुलाने पर क्या हुआ?

उत्तर: सिद्धार्थ के प्यार भरे बुलाने पर पक्षी तुरंत उड़कर उनकी गोद में आ गया और उनसे चिपक गया।

Q18. मंत्री ने क्या निर्णय दिया?

उत्तर: मंत्री ने निर्णय दिया कि पक्षी उसी का है जिसके पास वह स्वयं जाना चाहता है, इसलिए वह सिद्धार्थ को मिलना चाहिए।

Q19. महाराज ने अंतिम निर्णय क्या दिया?

उत्तर: महाराज ने मंत्री के निर्णय को स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि पक्षी सिद्धार्थ के पास ही रहेगा।

Q20. इस पाठ से क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर: इस पाठ से यह शिक्षा मिलती है कि दया और करुणा सबसे बड़ा गुण है तथा किसी की रक्षा करना उसे नुकसान पहुँचाने से अधिक श्रेष्ठ होता है।

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