Chapter 13: पेड़ों की अम्मा ‘तिमक्का’

अध्याय परिचय

“पेड़ों की अम्मा ‘तिमक्का’” एक प्रेरणादायक पाठ है जिसमें श्रीमती तिमक्का के जीवन और उनके पर्यावरण संरक्षण के कार्यों का वर्णन किया गया है। उन्होंने अपने जीवन में हजारों पेड़ लगाकर समाज के लिए एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। यह पाठ हमें प्रकृति से प्रेम, सेवा भावना और दृढ़ संकल्प की प्रेरणा देता है।

विस्तृत नोट्स (सरल भाषा में)

इस अध्याय में श्रीमती तिमक्का के जीवन के बारे में बताया गया है, जिन्हें ‘अम्मा’ और ‘वृक्षमाता’ के नाम से भी जाना जाता है। उनका जन्म कर्नाटक के तुमकुर जिले में हुआ था और वे वहीं रहती हैं। 

तिमक्का ने लगभग 80 वर्षों तक सड़कों के किनारे पेड़ लगाने का कार्य किया। शुरुआत में उन्होंने आर्थिक कठिनाइयों के कारण एक खान में मजदूर के रूप में काम किया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने समाज के लिए उपयोगी कार्य करना नहीं छोड़ा।

उन्हें ‘सालुमरदा तिमक्का’ भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है “पेड़ों की पंक्ति बनाने वाली”। उन्होंने हुलिकल और कुदुर के बीच 45 किलोमीटर लंबे रास्ते पर लगभग 385 बरगद के पेड़ लगाए, जिससे वह सड़क बहुत सुंदर और हरियाली से भर गई।

इसके अलावा उन्होंने 8000 से अधिक पेड़ लगाए, जिससे पर्यावरण को बहुत लाभ हुआ। इस कार्य में उनके पति ने भी उनका पूरा सहयोग किया।

उनकी इस महान सेवा के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2019 में पद्मश्री से सम्मानित किया। 

तिमक्का की उम्र 100 वर्ष से अधिक होने के बावजूद वे आज भी सक्रिय हैं और वनीकरण कार्यक्रमों में भाग लेती हैं। उनका जीवन यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी निष्ठा और समर्पण से समाज के लिए महान कार्य किए जा सकते हैं। 

👉 यह पाठ हमें पर्यावरण संरक्षण और सेवा भावना की प्रेरणा देता है।

शब्दार्थ (महत्वपूर्ण व कठिन शब्द)

शब्दअर्थ
वृक्षमातापेड़ों की माँ
वनीकरणपेड़ लगाने का कार्य
राजमार्गबड़ी सड़क
प्रसिद्धमशहूर
समर्पितपूरी तरह लग जाना
पर्यावरणहमारे आसपास का प्राकृतिक वातावरण
श्रमिकमजदूर
सम्मानितआदर दिया गया

प्रश्न-उत्तर

Q1: तिमक्का कौन हैं और उन्हें किन नामों से जाना जाता है?
तिमक्का एक प्रसिद्ध पर्यावरण प्रेमी महिला हैं, जिन्हें ‘अम्मा’, ‘वृक्षमाता’ और ‘सालुमरदा तिमक्का’ के नाम से जाना जाता है।


Q2: तिमक्का का जन्म कहाँ हुआ था?
तिमक्का का जन्म कर्नाटक राज्य के तुमकुर जिले में हुआ था और वे वहीं रहती हैं।


Q3: तिमक्का ने कौन-सा महत्वपूर्ण कार्य किया?
तिमक्का ने सड़कों के किनारे हजारों पेड़ लगाए और पर्यावरण को सुरक्षित बनाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।


Q4: ‘सालुमरदा’ शब्द का क्या अर्थ है?
‘सालुमरदा’ का अर्थ कन्नड़ भाषा में पेड़ों की पंक्ति होता है, इसलिए उन्हें यह नाम दिया गया।


Q5: तिमक्का ने किस स्थान पर पेड़ लगाए थे?
उन्होंने हुलिकल और कुदुर के बीच 45 किलोमीटर लंबे राजमार्ग पर पेड़ लगाए थे।


Q6: तिमक्का ने कितने बरगद के पेड़ लगाए?
तिमक्का ने लगभग 385 बरगद के पेड़ लगाए थे।


Q7: इन पेड़ों से क्या लाभ हुआ?
इन पेड़ों के कारण सड़क सुंदर और हरी-भरी हो गई तथा पर्यावरण को बहुत लाभ हुआ।


Q8: तिमक्का ने कुल कितने पेड़ लगाए?
उन्होंने 8000 से अधिक पेड़ लगाए।


Q9: तिमक्का को उनके कार्य में किसने सहयोग दिया?
उनके पति ने इस कार्य में उनका पूरा सहयोग किया।


Q10: तिमक्का को कौन-सा सम्मान मिला?
तिमक्का को उनके महान कार्य के लिए वर्ष 2019 में पद्मश्री पुरस्कार मिला।


Q11: तिमक्का ने अपने जीवन की शुरुआत में क्या काम किया था?
उन्होंने शुरुआत में आर्थिक कठिनाइयों के कारण खान में मजदूर के रूप में काम किया था।


Q12: तिमक्का कितने वर्षों से पेड़ लगा रही हैं?
तिमक्का लगभग 80 वर्षों से पेड़ लगा रही हैं।


Q13: तिमक्का की उम्र अधिक होने के बावजूद वे क्या करती हैं?
अधिक उम्र होने के बावजूद वे आज भी अच्छे कार्यों में सक्रिय रहती हैं और कार्यक्रमों में भाग लेती हैं।


Q14: तिमक्का को वनीकरण कार्यक्रमों में क्यों बुलाया जाता है?
क्योंकि उन्होंने पेड़ लगाने में बहुत बड़ा योगदान दिया है और वे प्रेरणा का स्रोत हैं।


Q15: तिमक्का का जीवन हमें क्या सिखाता है?
उनका जीवन हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी हमें समाज के लिए अच्छे कार्य करने चाहिए।


Q16: तिमक्का को ‘वृक्षमाता’ क्यों कहा जाता है?
उन्हें ‘वृक्षमाता’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने हजारों पेड़ लगाकर उन्हें अपने बच्चों की तरह पाला।


Q17: तिमक्का का व्यक्तित्व कैसा है?
तिमक्का का व्यक्तित्व प्रेरणादायक, समर्पित और समाजसेवी है।


Q18: पेड़ लगाने से हमें क्या लाभ होते हैं?
पेड़ हमें शुद्ध हवा, छाया, फल और पर्यावरण संतुलन प्रदान करते हैं।


Q19: हमें तिमक्का से क्या प्रेरणा लेनी चाहिए?
हमें उनसे प्रकृति की रक्षा करना और समाज के लिए काम करना सीखना चाहिए।


Q20: इस पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
इस पाठ का मुख्य संदेश है कि हमें पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए और समाज के लिए निस्वार्थ सेवा करनी चाहिए।

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